Tuesday, November 20, 2018

नदी जब निकलती है,*

,
*नदी जब निकलती है,*
*कोई नक्‍शा पास नहीं होता कि "सागर" कहां है।*
*बिना नक्‍शे के सागर तक पहुंच जाती है।*
*इसलिए "कर्म
" करते रहिये,*
*नक्शा तो भगवान् पहले ही बनाकर बैठे है ।*
*हमको तो सिर्फ "बहना" ही है ।।*

      *

0 coment�rios to “नदी जब निकलती है,*”

Post a Comment

 

Shayaribazar Copyright © 2011 | Template design by O Pregador | Powered by Blogger Templates