जो सम्मान से कभी गर्वित

*जो सम्मान से कभी गर्वित नहीं होते,*
*अपमान से क्रोधित नहीं होते,*
*और..*
*क्रोधित
होकर भी जो कभी*
*कठोर नहीं बोलते,*

*वास्तव में वे ही “श्रेष्ठ” होते हैं.*