Sunday, September 16, 2018

ये जीवन है...साहब

,
: 🍃 *ये जीवन है...साहब..*
  *उलझेंगे नहीं,*
  *तो सुलझेंगे कैसे...*
  *और बिखरेंगे नहीं,*
  *तो निखरेंगे कैसे....*
🍃 *"ख़्वाब भले टूटते रहे मगर "हौंसले
"*
*फिर भी ज़िंदा हो*

*"हौसला " अपना ऐसा रखो जहाँ*
*मुश्किलें भी शर्मिंदा हो !!"".........*

0 coment�rios to “ये जीवन है...साहब”

Post a Comment

 

Shayaribazar Copyright © 2011 | Template design by O Pregador | Powered by Blogger Templates