कुछ न कुछ कर

कुछ न कुछ कर
बेठने की ही कर्तव्य नहीं कहा जा सकता | कोई समय ऐसा भी होता है,जब कुछ न करना ही सबसे बड़ा कर्तव्य माना जाता है |