*आँसू* न होते तो



   *आँसू
* न होते तो *आंखे* इतनी खुबसूरत न होती,
*दर्द* न होता तो *खुशी* की कीमत न होती
अगर *मिल* जाता सब-कुछ केवल *चाहने* ही से
तो *दुनिया* में *"ऊपर वाले"* की जरूरत ही न होती  !