Saturday, August 18, 2018

बिकती है ना ख़ुशी कहीं

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👌👌👌👌🌹
*बिकती है ना ख़ुशी कहीं*,
*ना कहीं गम बिकता है..*.
*लोग गलतफहमी
में हैं*,
*कि शायद कहीं मरहम बिकता है..*.

*इंसान ख्वाइशों से बंधा हुआ एक जिद्दी परिंदा है,*
*उम्मीदों से ही घायल है और*
*उम्मीदों पर ही जिंदा है*
         

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