बिकती हैं ना खुशी कहीं



*बिकती हैं ना खुशी कहीं*
*ना कहीं गम बिकता हैं*

*लोग गलतफहमी में हैं कि*
*शायद कहीं मरहम बिकता है*

*ये इंसान ख्वाहिशों
से बंधा*
*हुआ एक जिद्दी परिन्दा है*

*उम्मीदों से ही घायल है*...
*और उम्मीदों पर ही जिन्दा हैं*