नियम ऐसा ही है कि

नियम ऐसा ही है कि जब अपमान का भय नहीं रहेगा, तब कोई अपमान नहीं करेगा। जब तक भय है तब तक व्यापार है, भय गया कि व्यापार बंद।
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