Monday, July 23, 2018

जिन्दगीं को देखने का

,
*जिन्दगीं को देखने का*
              *सबका*
*अपना अपना नजरिया होता है*

*कुछ  लोग  भावना  में  ही*
*दिल की बात कह देते है,*
              *और...*
   *कुछ  लोग  गीता  पर  हाथ*
   *रख कर भी सच नहीं बोलते*

0 coment�rios to “जिन्दगीं को देखने का”

Post a Comment

 

Shayaribazar Copyright © 2011 | Template design by O Pregador | Powered by Blogger Templates