Tuesday, July 24, 2018

*ऐ “सुबह ” तुम जब भी आना,*

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 *ऐ “सुबह ” तुम जब भी आना,*
     *सब के लिए बस "खुशियाँ" लाना.*
*हर चेहरे पर “हंसी ” सजाना,*
          *हर आँगन मैं “फूल ”* *खिलाना.*
*जो “रोये ” हैं  इन्हें हँसाना.*
               *जो “रूठे ” हैं  इन्हें मनाना,*
*जो “बिछड़े” हैं तुम इन्हें मिलाना.*
       *प्यारी “सुबह ” तुम जब भी आना,*
*सब के लिए बस “खुशियाँ ”ही लाना.*

   

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