मुट्ठी भर ही चाहिए, तो सिकँदर हो जाओ,*

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: *मुट्ठी भर ही चाहिए, तो सिकँदर हो जाओ,*


*और अगर पूरी क़ायनात चाहिए, तो कबीर होना होगा..*
*जब*
*मन ही अंधा हो,*

*तो*
*आँखे किसी*
*काम की नहीं रहती .......!*🌷🌷

 *अगर मुस्कुराहट के लिए ईश्वर का शुक्रिया नहीं किया,*

*तो आँखों मे आये आँसुओं के लिये शिकायत का हक़ कैसा??*

       *सुप्रभात जय श्री कृष्णा*
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