बेगानों से गुजर जाते

बेगानों से गुजर जाते है कोई बात नहीं होती,
हम उनसे रोज मिलते हैं मगर मुलाक़ात नहीं होती,
सूखे बंजर खेत जैसी जिंदगी बेहाल है,
घटाएं घिर तो आती है मगर बरसात नहीं होती..
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